शैख़-जी मिंदील कुछ बिगड़ी सी है क्या आप भी
रिंदों बाँकों मय-कशों आशुफ़्ता दस्तारों में थे
“Sheikh-ji, is something wrong with your handkerchief, or are you also among the intoxicated, wine-loving, and agitated ones?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शेख़-जी, मिंदील कुछ बिगड़ी सी है क्या आप भी रिंदों, बाँकों, मय-कशों, आशुफ़्ता दस्तारों में थे?
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एक मिंदील के बारे में नहीं है, बल्कि रिश्तों की उलझन को दिखाता है। शायर कहते हैं कि उन्होंने देखा कि मिंदील थोड़ी बिगड़ी है, और सवाल यह है कि क्या गलती मिंदील की है, या आपके दिल की? दूसरा मिसरा एक रंगीन महफ़िल का नज़ारा पेश करता है, जहाँ नशा और इश्क़... सब कुछ बेपरवाह है। यह शायरी उस पल को पकड़ती है जब नशा इंसान को सच और झूठ के बीच का फ़र्क़ भुला देता है।
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