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पलकों पे थे पारा-ए-जिगर रात हम आँखों में ले गए बसर रात

On eyelids lay the mercury of the heart at night, We spent the night within our eyes.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पलकों पर जिगर की बेचैनी रात भर थी, और हमने पूरी रात अपनी आँखों में ही बिता दी।

विस्तार

ये शेर उस मोहब्बत की शिद्दत को बयां करता है, जहाँ नज़रों का जादू किसी आग से कम नहीं होता। शायर कह रहे हैं कि रात का गुज़रना भी एक जुनून जैसा है.... और इस जुनून में, हम रात गुज़ारना भी महबूब की आँखों में चुनते हैं। यह सिर्फ़ एक रात नहीं है, यह एक इबादत है.... जहाँ आँखें ही हमारा वजूद बन जाती हैं।

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