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वाँ तुम तो बनाते ही रहे ज़ुल्फ़ आशिक़ की भी याँ गई गुज़र रात

You kept styling your tresses, and the night passed by, even for the lover.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम तो बस ज़ुल्फ़ संवारती ही रहीं, और आशिक़ के लिए भी रात गुज़र गई।

विस्तार

यह शेर महबूब के जादू का एहसास कराता है। शायर कहते हैं कि आप अपनी ज़ुल्फ़ें इतनी सजाती रहीं.... कि आशिक़ के लिए तो रात का गुज़रना भी मुश्किल हो गया। यह इश्क़ की उस कशिश को बयां करता है, जहाँ महबूब का एक नज़ारा ही वक़्त को भी थाम लेता है। क्या आप कभी ऐसा महसूस करते हैं?

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