बातिल-उस-सेहर देख बातिल थे
तेरी आँखों का सेहर आफ़त है
“Seeing the false dawn, I saw that you were false; / The dawn of your eyes is a calamity.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बातिल-उस-सेहर को देखकर मैं यह समझा कि तुम झूठे थे; तुम्हारी आँखों की सुबह एक विपत्ति है।
विस्तार
यह शेर भ्रम और सच्चाई के बीच के रिश्ते को दिखाता है। शायर कहते हैं कि जो सुबहें (सेहर) हमने दुनिया में देखीं, वे सब झूठी थीं। लेकिन जो सुबह उनकी आँखों में झलकती है, वो किसी आपदा से कम नहीं है! यह इश्क़ की उस खतरनाक खूबसूरती को बयां करता है, जहाँ रौशनी भी दर्द देती है।
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