छूटता कब है असीर-ए-ख़ुश-ज़बाँ
जीते जी अपनी रिहाई हो चुकी
“When will the captive of the sweet tongue be freed, That its freedom is achieved while still alive.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सुंदर वाणी के बंदी कब मुक्त होंगे, कि जीवित रहते ही उनकी रिहाई हो जाएगी।
विस्तार
यह शेर सिर्फ शब्दों की बात नहीं करता, यह दिल की गहराई की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि आप किसी मीठी ज़बान के क़ैदी तो हैं, लेकिन असली बात ये है कि आपकी आज़ादी... वो तो आपको जीते-जी मिल चुकी है। यानी, जो एहसास आपको आज़ाद करता है, वो एहसास तो दिल में पहले ही बस चुका है। यह एक ऐसी मुक्ति है जो बाहर नहीं, अंदर से मिलती है।
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