आगे हो मस्जिद के निकली उस की राह
शैख़ से अब पारसाई हो चुकी
“The path of her departure from the mosque is clear, She has now become separated from the Sheikh.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मस्जिद से आगे, उसकी राह निकल आई है। अब वह शेख से पार हो चुकी है।
विस्तार
यह शेर बस एक बिछड़ने का नज़ारा नहीं है, यह तो रूह का सफ़र है। शायर बता रहे हैं कि महबूबा अब उस रास्ते पर निकल गई है, जो न सिर्फ़ मस्जिद से गुज़रता है, बल्कि किसी भी सहारे, किसी भी रूहानी राह से दूर जा रहा है। 'शैख़ से पारसाई' होना मतलब है कि अब कोई भी गुरु या सहारा उसे रोक नहीं सकता। यह बिछड़ना इतना गहरा है कि वक़्त और आस्था, दोनों से कोसों दूर है। एक ऐसा दर्द जो सिर्फ़ आशिक़ महसूस कर सकता है।
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