जो हो कर अब्र से मायूस ख़ुद सींचे कभी दहक़ाँ जला दें खेत को पानी की लहरें बिजलियाँ हो कर

“If, despairing of the clouds, the peasant ever waters the soil himself, the very ripples of water turn to lightning and burn his field to ash.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

यदि किसान बादलों से निराश होकर कभी स्वयं अपनी खेती को सींचे, तो पानी की लहरें ही बिजलियाँ बनकर उसके खेत को जला देती हैं।

विस्तार

यह शेर क़िस्मत की सितमज़रीफ़ी और बेबसी की इंतहा को बहुत दर्दनाक तरीक़े से बयां करता है। जब एक मजबूर किसान बादलों की उम्मीद छोड़कर अपने बलबूते पर खेत को सींचने निकलता है, तो वही जीवन देने वाला पानी बिजली बनकर उसकी फ़सल को राख कर देता है। शायर यहाँ ज़िंदगी की उस कड़वी हक़ीक़त की बात कर रहा है जहाँ इंसान जब ख़ुद को बचाने की आख़िरी कोशिश करता है, तो उसका सहारा ही उसकी तबाही का सबब बन जाता है।

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