ग़ाफ़िल ओ होश्यार वो तिमसाल-ए-यक-आईना हैं वर्ता-ए-हैरत में नादाँ आप हैं दाना हैं आप

“The heedless and the watchful are reflections cast in a single mirror; in this whirlpool of wonder, both the fool and the sage are You.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ग़ाफ़िल और होशियार दोनों एक ही आईने के प्रतिबिंब हैं; हैरानी के इस भंवर में नादान भी आप ही हैं और समझदार भी आप ही हैं।

विस्तार

यह शे'र सूफ़ी दर्शन की उस गहरी हक़ीक़त को छूता है जहाँ सारी कायनात एक ही नूर का आईना है। शायर कहते हैं कि दुनिया का बेख़बर इंसान हो या कोई बड़ा दाना, दोनों अलग नहीं बल्कि एक ही शीशे में उभरने वाले दो अलग अक्स हैं। हैरत के इस भंवर में जब इंसान गौर करता है, तो सारे भेद मिट जाते हैं और समझ आता है कि हर रूप में वही एक परवरदिगार जलवागर है।

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