“From us, O darling of luxury, you ought to veil your face; for we ever heave sighs, and mirror-bright is your grace.”
ऐ ऐशो-आराम में रहने वाले, आपको हमसे अपना चेहरा छिपाना चाहिए; क्योंकि हम हर घड़ी आहें भरते हैं और आपका चेहरा आईने की तरह साफ़ व चमकदार है (जो हमारी साँस से धुंधला हो सकता है)।
इस शेर में आशिक़ अपने नाज़ुक और ऐश-ओ-इशरत में पले महबूब को बड़ी मोहब्बत भरी चेतावनी दे रहा है। पुरानी शायरी की एक मशहूर रिवायत है कि गर्म साँसों या आहों से आईना धुंधला पड़ जाता है। चूँकि महबूब का चेहरा आईने जैसा साफ़ और चमकदार है और आशिक़ इश्क़ के दर्द में लगातार ठंडी-गर्म आहें भरता रहता है, तो उसे डर है कि उसकी साँसों की तपिश से महबूब का नूर मद्धम न पड़ जाए। यह असल में मुँह छिपाने की सलाह नहीं, बल्कि महबूब के हुस्न की नज़ाकत की बेपनाह तारीफ़ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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