ग़ुबार-ए-राह से ऐ 'नज़्म' ये आवाज़ आती है गई ऐ उम्र-ए-रफ़्ता तू किधर फेंका कहाँ मुझ को

“From the dust of the road, O Nazm, this plaintive voice calls out: / Where have you gone, O departed life? Where have you cast me about?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ 'नज़्म', रास्ते की धूल से यह आवाज़ सुनाई देती है कि ऐ बीती हुई ज़िंदगी, तू किधर चली गई और मुझे किस हाल में कहाँ लाकर फेंक दिया?

विस्तार

इस शेर में शायर खुद को रास्ते की उड़ती हुई धूल (ग़ुबार-ए-राह) के रूप में देखता है, जो पैरों तले रौंद कर बेसहारा छोड़ दी गई है। वह अपनी बीती हुई ज़िंदगी यानी जवानी से एक दर्दभरा शिकवा करता है कि तू मुझे इस लाचारी के मोड़ पर अकेला छोड़कर कहाँ चली गई? यह गुज़रते वक्त की बेरुखी, बुढ़ापे की बेबसी और खोए हुए वजूद की टीस को बेहद खूबसूरती से बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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