“তোমার পানে চাহিয়া থাকি নয়নভরা আশে, তুমি আসো নাই, তবু তোমার ছায়া পড়ে মোর পাশে॥”
मैं तुम्हारी ओर आशा भरी नज़रों से देखता रहता हूँ। तुम नहीं आए, फिर भी तुम्हारी परछाई मेरे पास पड़ती है।
यह दोहा गहरी चाहत और अटूट उम्मीद को खूबसूरती से बयां करता है। वक्ता किसी खास दिशा में बड़ी उत्सुकता से देख रहा है, उसकी आँखें उस व्यक्ति की उम्मीद से भरी हैं जिसकी उसे बहुत आकांक्षा है। हालांकि, वह प्रियजन शारीरिक रूप से आया नहीं है, फिर भी उसकी उपस्थिति वक्ता के मन में इतनी जीवंत है कि ऐसा लगता है मानो उसकी परछाई, उसके अस्तित्व का एक सूक्ष्म संकेत, पहले ही आ गई हो और उसके बगल में ठहर गई हो। यह इस बात की एक मार्मिक अभिव्यक्ति है कि कैसे प्रेम और उम्मीद अनुपस्थित को भी स्पष्ट रूप से उपस्थित महसूस करा सकते हैं, कल्पना के माध्यम से निकटता का एक ठोस एहसास पैदा करते हैं।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
