किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता कि आतिश गुल कूँ करती है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता

“My passion melted that cruel beloved to water, soft and slow, just as fire distils the rose into sweet water in its gentle glow.”

— वली दकनी
अर्थ

मेरे इश्क़ ने उस ज़ालिम महबूब को धीरे-धीरे पिघलाकर पानी कर दिया, ठीक वैसे ही जैसे आग आहिस्ता-आहिस्ता गुलाब के फूल को अर्क बना देती है।

विस्तार

वली दकनी इस शेर में प्रेम के धैर्य और उसकी जादुई तासीर को बड़ी नज़ाकत से बयां करते हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह धीमी आँच गुलाब की पंखुड़ियों को जलाती नहीं, बल्कि आहिस्ता-आहिस्ता उसका मीठा अर्क (गुलाब जल) बना देती है, ठीक वैसे ही मेरे इश्क़ की निरंतर तपन ने उस पत्थर-दिल महबूब को भी पिघला दिया। यह शेर दिखाता है कि सच्चा प्यार किसी ज़िद या जल्दबाज़ी से नहीं, बल्कि अपने गहरे सब्र से कठोर से कठोर दिल को भी नर्म कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.