“My passion melted that cruel beloved to water, soft and slow, just as fire distils the rose into sweet water in its gentle glow.”
मेरे इश्क़ ने उस ज़ालिम महबूब को धीरे-धीरे पिघलाकर पानी कर दिया, ठीक वैसे ही जैसे आग आहिस्ता-आहिस्ता गुलाब के फूल को अर्क बना देती है।
वली दकनी इस शेर में प्रेम के धैर्य और उसकी जादुई तासीर को बड़ी नज़ाकत से बयां करते हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह धीमी आँच गुलाब की पंखुड़ियों को जलाती नहीं, बल्कि आहिस्ता-आहिस्ता उसका मीठा अर्क (गुलाब जल) बना देती है, ठीक वैसे ही मेरे इश्क़ की निरंतर तपन ने उस पत्थर-दिल महबूब को भी पिघला दिया। यह शेर दिखाता है कि सच्चा प्यार किसी ज़िद या जल्दबाज़ी से नहीं, बल्कि अपने गहरे सब्र से कठोर से कठोर दिल को भी नर्म कर देता है।
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