ग़ज़ल

मैं आशिक़ी में तब सूँ अफ़्साना हो रहा हूँ

میں عاشقی میں تب سوں افسانہ ہو رہا ہوں
वली दकनी· Ghazal· 7 shers· radif: हो रहा हूँ

यह दकनी ग़ज़ल इश्क़ की बेख़ुदी और महबूब के प्रति अनन्य समर्पण को बयां करती है। शायर कहता है कि महबूब की एक नज़र ने उसे पूरी दुनिया से बेगाना कर दिया है और उसकी आशिक़ी अब ज़माने में एक अफ़साना बन चुकी है।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
मैं आशिक़ी में तब सूँ अफ़्साना हो रहा हूँ तेरी निगह का जब सूँ दीवाना हो रहा हूँ
जब से मैं तुम्हारी निगाह का दीवाना हुआ हूँ, तब से इश्क़ की दुनिया में एक अफ़साना (चर्चित दास्तान) बन गया हूँ।
2
ऐ आश्ना करम सूँ यक बार आ दरस दे तुझ बाज सब जहाँ सूँ बेगाना हो रहा हूँ
हे प्रिय, कृपा करके एक बार आकर मुझे अपना दर्शन दे दो, क्योंकि तुम्हारे बिना मैं सारी दुनिया से बेगाना हो गया हूँ।
3
बाताँ लगन की मत पूछ ऐ शम-ए-बज़्म-ए-ख़ूबी मुद्दत से तुझ झलक का परवाना हो रहा हूँ
ऐ सौंदर्य की महफ़िल की शमा, मेरी लगन और प्रेम की बातें मत पूछ; मैं बहुत समय से तुम्हारी एक झलक पाने के लिए परवाना बना हुआ हूँ।
4
शायद वो गंज-ए-ख़ूबी आवे किसी तरफ़ सूँ इस वास्ते सरापा वीराना हो रहा हूँ
शायद अच्छाई और ख़ूबसूरती का वह ख़ज़ाना किसी तरफ़ से आ जाए, इसी उम्मीद में मैं सिर से पाँव तक पूरी तरह वीराना बन रहा हूँ।
5
सौदा-ए-ज़ुल्फ़-ए-ख़ूबाँ रखता हूँ दिल में दाइम ज़ंजीर-ए-आशिक़ी का दीवाना हो रहा हूँ
मैं अपने दिल में हमेशा सुंदरियों की ज़ुल्फ़ों की दीवानगी पाले रखता हूँ, और इश्क़ की ज़ंजीरों का दीवाना बनता जा रहा हूँ।
6
बरजा है गर सुनूँ नईं नासेह तिरी नसीहत मैं जाम-ए-इश्क़ पी कर मस्ताना हो रहा हूँ
ऐ उपदेशक! अगर मैं तुम्हारी नसीहत न सुनूँ तो यह बिल्कुल उचित है, क्योंकि मैं इश्क़ का प्याला पीकर मदहोश हो रहा हूँ।
7
किस सूँ 'वली' अपस का अहवाल जा कहूँ मैं सर-ता-क़दम मैं ग़म सूँ ग़म-ख़ाना हो रहा हूँ
ऐ वली, मैं जाकर अपना हाल किससे कहूँ? सिर से पाँव तक मैं दुःख और ग़म के कारण पूरी तरह ग़म का घर बन गया हूँ।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.