तुझ चाल की क़ीमत सूँ दिल नीं है मिरा वाक़िफ़ ऐ मान भरी चंचल टुक भाव बताती जा

“My heart knows not the price of your alluring gait; O proud, coquettish beauty, reveal your price and state!”

— वली दकनी
अर्थ

मेरा दिल तुम्हारी खूबसूरत चाल की क़ीमत से वाक़िफ़ नहीं है; ऐ नाज़-ओ-अंदाज़ वाली शोख़ माशूक़ा, ज़रा इसकी क़ीमत तो बताती जाओ।

विस्तार

दकनी शायरी के इस बेहद दिलकश शेर में आशिक़ अपनी महबूबा की नज़ाकत और ख़ूबसूरत चाल पर फ़िदा होकर बाज़ार का एक प्यारा सा रूपक बांधता है। वह छेड़ते हुए कहता है कि उसका दिल इस क़यामत भरी चाल की क़ीमत से अंजान है, इसलिए वह इस नाज़-नख़रे वाली चंचल हसीना से गुज़ारिश करता है कि ज़रा रुककर अपना मोल तो बताती जाए। यहाँ 'भाव' शब्द में बाज़ार के दाम के साथ-साथ हुस्न के तेवर और दिलकश अदाओं का भी बड़ा ही मीठा तालमेल झलकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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