ऐ शौक़ वही मय पी ऐ होश ज़रा सो जा मेहमान-ए-नज़र इस दम एक बर्क़-ए-तजल्ली है

“Drink that very wine, O longing, and let reason sleep a while; for the guest of my sight this moment is a lightning flash of divine radiance.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

ऐ चाहत, तू वही शराब पी ले और ऐ होश, तू ज़रा सो जा; क्योंकि इस समय मेरी नज़रों की मेहमान ईश्वरीय प्रकाश की एक कौंधती बिजली है।

विस्तार

इस शेर में शायर अक़्ल और समझदारी को थोड़ी देर सोने का मशवरा दे रहे हैं, ताकि दिल का शौक़ उस ख़ास कैफ़ियत और बेखुदी में डूब सके। इस वक़्त निगाहों के सामने नूर की एक ऐसी कड़कड़ाती बिजली (बर्क़-ए-तजल्ली) मेहमान बनकर आई है, जिसे संभालना होश-ओ-हवास के बस में नहीं। यह उस जादुई और रूहानी लम्हे का बयान है जहाँ सोच-विचार बेमानी हो जाता है और सिर्फ़ हैरत और इश्क़ बाकी रह जाते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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