उस मय से नहीं मतलब दिल जिस से है बेगाना मक़्सूद है उस मय से दिल ही में जो खिंचती है

“I care not for that wine to which the heart remains estranged; my quest is for that wine alone which is distilled within the heart.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे उस शराब से कोई सरोकार नहीं जिससे दिल बेगाना रहे, मेरा मक़सद केवल उस शराब से है जो दिल के अंदर ही तैयार होती है।

विस्तार

यहाँ शायर मदिरा (मय) को रूहानी और दिली जज़्बात के एक गहरे प्रतीक के रूप में पेश कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उन्हें उस बाहरी नशे या दिखावे से कोई सरोकार नहीं, जिससे दिल अछूता रह जाए और कोई गहरा असर न हो। असली तलाश तो उस मय की है, जो इंसान के अपने दिल के दर्द, सच्ची मोहब्बत और अहसासों की भट्टी में खिंचकर तैयार होती है।

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