“Her fiery gaze remained upon me, even through Christmas tide; for in my fate, chill December too became the blazing heat of June.”
क्रिसमस के सर्द मौसम में भी मुझ पर उनकी निगाह की गर्माहट बनी रही, जिससे मेरे लिए दिसंबर का महीना भी जून जैसी तपिश में बदल गया।
इस शेर में शायर ने मौसम की ठंडक और महबूब की नज़र की तपिश का बड़ा ही ख़ूबसूरत और चुलबुला अंदाज़ दिखाया है। क्रिसमस के वक़्त जब दिसंबर की ठिठुरती ठंड अपने उरूज पर थी, तब भी माशूक़ की एक गर्म नज़र ने आशिक़ की दुनिया को जून की तपती दोपहरी जैसा बना दिया। यह बात सीधे दिल को छूती है कि एक आशिक़ के लिए मौसम बाहर की हवाओं से नहीं, बल्कि महबूब की आँखों के अंदाज़ से तय होता है।
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