मिरी वफ़ा में है क्या तज़लज़ुल मिरी इताअ'त में क्या कमी है ये क्यूँ निगाहें फिरी हैं मुझ से मिज़ाज में क्यूँ ये बरहमी है

“Has my fidelity begun to waver, or does my submission fall short somehow? / Why have your eyes turned away from me, why this displeasure upon your brow?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

क्या मेरी वफ़ादारी में कोई डगमगाहट है या मेरी आज्ञाकारिता में कोई कमी रह गई है, जो तुम्हारी नज़रें मुझसे फिर गई हैं और तुम्हारे मिज़ाज में यह नाराज़गी है?

विस्तार

इस शेर में आशिक़ का वह दर्द और असमंजस छलकता है जब उसका महबूब बिना किसी साफ़ वजह के उससे बेरुखी बरतने लगता है। वह हैरान होकर खुद से ही सवाल करता है कि क्या मेरी वफ़ा डगमगा गई या मेरे समर्पण में कोई कमी रह गई, जो आपने आँखें फेर लीं? महबूब का यह अचानक बदला हुआ मिज़ाज और बेरुख़ी एक सच्चे प्रेमी के दिल को अंदर तक झकझोर देती है, जिसे अपनी किसी ख़ता का इल्म तक नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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