“Witnessing my willingness to sacrifice my life, they exclaimed: 'Devotees ready to die are few, spectators are many.'”
मेरी जान कुर्बान करने की लगन को देखकर वे बोल उठे कि खुद को न्योछावर करने वाले आशिक बहुत कम हैं, जबकि तमाशा देखने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है।
इस शेर में सच्चे समर्पण और तमाशबीन दुनिया के बीच का गहरा फ़र्क़ दिखाया गया है। जब आशिक़ महबूब के लिए अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार हो जाता है, तो महबूब भी उसकी सच्चाई देखकर बोल पड़ता है कि तमाशा देखने वाले तो हज़ारों हैं, मगर सचमुच मिटने वाले बिरले ही होते हैं। यह शेर भीड़ की सतही दिलचस्पी और एक सच्चे आशिक़ की वफ़ादारी के दर्द को बड़ी सादगी से बयां करता है।
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