हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ

“That for which I perish is something else entirely; the world may hold a hundred thousand like you, yet none can be you.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हम जिस बात पर जान दे रहे हैं वह बात ही कुछ अलग है; इस दुनिया में तुम्हारे जैसे भले ही लाखों हों, लेकिन कोई भी सचमुच तुम जैसा नहीं हो सकता।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस अनोखे एहसास को छूता है जिसे शब्दों में बाँधना मुमकिन नहीं। शायर कहता है कि ज़माने में तेरे जैसे हसीन और दिलकश लोग लाखों हो सकते हैं, मगर दिल जिस ख़ास अदा पर फ़िदा है, वह सिर्फ़ तुझमें है। यहाँ बात केवल बाहरी ख़ूबसूरती की नहीं, बल्कि उस नायाब और रूहानी कशिश की है जो महबूब को पूरी कायनात में बेमिसाल बना देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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