सिर्र-ए-बातिन को फ़ाश कर या रब अहल-ए-ज़ाहिर बहुत सताने लगे

“Lay bare the secret of the inner realm, O Lord, / For those bound to outward forms torment me sorely now.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हे ईश्वर, आंतरिक सत्य और रहस्य को प्रकट कर दे, क्योंकि बाहरी दिखावे में उलझे लोग मुझे बहुत सताने लगे हैं।

विस्तार

इस शेर में दिल की गहरी सच्चाई और बाहरी दिखावे के बीच की तकरार को बड़े दर्द से बयां किया गया है। शायर उन लोगों से तंग आ चुका है जो सिर्फ बाहरी रस्मों और ढोंग के आधार पर दूसरों के किरदार को परखते हैं। थक-हार कर वह सीधे खुदा से गुहार लगाता है कि वह रूहानी हकीकत का पर्दा उठा दे, ताकि दुनिया यह जान सके कि असली पाकीजगी दिखावे में नहीं बल्कि दिल की नीयत में होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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