जी में है लूँ रज़ा-ए-पीर-ए-मुग़ाँ क़ाफ़िले फिर हरम को जाने लगे

“I feel an urge to seek the Tavern Elder's leave, / For caravans once more set forth toward the sacred shrine.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

मेरे दिल में यह इच्छा है कि मैं मयख़ाने के बुज़ुर्ग (पीर-ए-मुग़ाँ) की रज़ा और इजाज़त ले लूँ, क्योंकि क़ाफ़िले एक बार फिर पवित्र हरम की ओर रवाना होने लगे हैं।

विस्तार

यहाँ औपचारिक धर्म और सच्चे प्रेम के बीच की कशमकश को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां किया गया है। जब ज़ाहिरी इबादत के लिए लोगों के क़ाफ़िले हरम की पवित्र यात्रा पर निकल रहे हैं, तो शायर का दिल भी चलने को करता है, मगर वह पहले मयख़ाने के रहबर यानी 'पीर-ए-मुग़ाँ' की इजाज़त लेना चाहता है। यह शे’र साफ़ करता है कि सूफ़ी रिवायत में दिखावे के हज या इबादत से कहीं ज़्यादा अहम रूहानी मुर्शिद और दिल की सच्चाई से वफ़ादारी निभाना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.