“A priceless treasure is the verse of Hali; ask of my worth from the words I speak.”
हाली की शायरी एक बेशक़ीमती दौलत है, मेरी असली क़ीमत और औक़ात मेरी बातों और कलाम से पूछो।
इस शे'र में हाली बड़े फ़ख़्र और सादगी से अपनी शायरी की अहमियत बयान करते हैं। वे कहते हैं कि उनका कलाम कोई मामूली चीज़ नहीं बल्कि एक अनमोल ख़ज़ाना है, जिसे दुनियावी तराज़ू में नहीं तौला जा सकता। अगर किसी को उनकी असल क़द्र जाननी है, तो वह उनकी गुफ़्तार यानी उनकी बातों और अल्फ़ाज़ के जादू को परखे, क्योंकि एक शाइर की असली पहचान उसकी ज़ुबान और सोच की गहराई में ही बसती है।
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