“Hear of the rivals' fidelity from the rivals themselves; ask the doors and the walls to speak of my love.”
औरों यानी प्रतिद्वंद्वियों की वफ़ादारी की बातें खुद उन्हीं से सुन लो, लेकिन अगर मेरी मोहब्बत के बारे में जानना है तो अपने घर के दर-ओ-दीवार से पूछो।
यहाँ शायर दिखावे की वफ़ा और ख़ामोश, सच्ची मोहब्बत के बीच का गहरा फ़र्क समझा रहा है। दूसरे लोग तो अपनी वफ़ादारी के बड़े-बड़े दावे खुद अपनी ज़ुबान से करते हैं, लेकिन आशिक़ को अपनी मोहब्बत साबित करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं। उसके घर के 'दर-ओ-दीवार', जिन्होंने उसकी तन्हाई, बेक़रारी और रतजगों को देखा है, उसकी बेपनाह उल्फ़त की सबसे सच्ची गवाही देते हैं।
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