है तजल्ली भी नक़ाब-ए-रू-ए-यार उस को किन आँखों से देखा चाहिए

“The very radiance itself is a veil upon the Beloved's face; with what eyes, then, can one ever hope to behold?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

महबूब के चेहरे का नूर ही एक पर्दा बन गया है, ऐसे में समझ नहीं आता कि उसे भला किन आँखों से देखा जाए।

विस्तार

शायर यहाँ एक बेहद ख़ूबसूरत विरोधाभास पेश करते हैं—आमतौर पर परदा छुपाता है और रोशनी दिखाती है, लेकिन महबूब का नूर इतना तेज़ है कि वही नूर एक नक़ाब बन गया है। जब अत्यधिक रौशनी ही आँखों को चौंधिया दे, तो आम नज़रों से उस रूप को देख पाना नामुमकिन हो जाता है। इसलिए शायर हैरान होकर पूछते हैं कि उस असीम हुस्न या ईश्वरीय सत्ता का दीदार करने के लिए आख़िर किस तरह की रूहानी आँखों की ज़रूरत होगी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.