कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है कल बता देगी ख़िज़ाँ ये कि वतन किस का है

“Between the partridge and the dove a dispute rages: to whom does the garden belong? / Tomorrow autumn shall reveal whose true homeland it was all along.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

तीतर और फ़ाख़्ता में यह विवाद चल रहा है कि यह बाग़ किसका है, लेकिन कल पतझड़ आकर यह फ़ैसला कर देगा कि यह वास्तव में किसका वतन है।

विस्तार

शायर यहाँ दुनियावी चीज़ों और मालिकाना हक़ पर इंसान के व्यर्थ झगड़ों पर बड़ी गहरी बात कहते हैं। बहार के दिनों में तीतर और फ़ाख़्ता इस बात पर बहस कर रहे हैं कि यह हसीन बाग़ किसका है, मगर वे यह भूल जाते हैं कि यह रौनक महज़ कुछ दिनों की है। जैसे ही पतझड़ (ख़िज़ाँ) का मुश्किल दौर आएगा, सारा भ्रम टूट जाएगा और साफ़ हो जाएगा कि इस मिट्टी से सचमुच किसका नाता था और किसका दावा सिर्फ़ मतलब का था।

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