ग़ज़ल

कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है

کبک و قمری میں ہے جھگڑا کہ چمن کس کا ہے
अल्ताफ़ हुसैन हाली· Ghazal· 10 shers· radif: किस का है

यह ग़ज़ल चमन के स्वामित्व पर पक्षियों के विवाद के माध्यम से सांसारिक सत्ता, भूमि और अधिकार की नश्वरता को दर्शाती है। कवि यह दार्शनिक संदेश देते हैं कि समय का चक्र और पतझड़ हर प्रकार के मानवीय दावों और झूठे घमंड को अंततः मिटा देते हैं।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है कल बता देगी ख़िज़ाँ ये कि वतन किस का है
तीतर और फ़ाख़्ता में यह विवाद चल रहा है कि यह बाग़ किसका है, लेकिन कल पतझड़ आकर यह फ़ैसला कर देगा कि यह वास्तव में किसका वतन है।
2
फ़ैसला गर्दिश-ए-दौराँ ने किया है सौ बार मर्व किस का है बदख़शान ओ ख़ुतन किस का है
वक़्त के बदलते दौर ने सैकड़ों बार यह फ़ैसला किया है कि मर्व किसका है और बदख़्शाँ तथा ख़ोतन पर किसका अधिकार है।
3
दम से यूसुफ़ के जब आबाद था याक़ूब का घर चर्ख़ कहता था कि ये बैत-ए-हुज़न किस का है
जब यूसुफ़ की मौजूदगी से याक़ूब का घर आबाद और खुशहाल था, तब आसमान पूछता था कि यह ग़म का घर (बैत-ए-हुज़न) किसका है।
4
मुतमइन इस से मुसलमाँ न मसीही न यहूद दोस्त क्या जानिए ये चर्ख़-ए-कुहन किस का है
इस पुराने आसमान (दुनिया) से न तो मुसलमान संतुष्ट है, न ईसाई और न ही यहूदी; ऐ दोस्त, कौन जाने कि यह प्राचीन आसमान आख़िर किसका है?
5
वाइ'ज़ इक ऐब से तू पाक है या ज़ात-ए-ख़ुदा वर्ना बे-ऐब ज़माने में चलन किस का है
हे उपदेशक! किसी भी दोष से या तो केवल तुम मुक्त हो या फिर स्वयं ईश्वर; वरना इस ज़माने में किसका आचरण पूरी तरह निष्कलंक है?
6
आज कुछ और दिनों से है सिवा इस्तिग़राक़ अज़्म-ए-तस्ख़ीर फिर ऐ शेख़-ए-ज़मन किस का है
आज आपका ध्यान और लीनता बाकी दिनों से कहीं अधिक है; ऐ ज़माने के बुज़ुर्ग, अब आप किसे अपने वश में करने या जीतने का इरादा रखते हैं?
7
आँख पड़ती है हर इक अहल-ए-नज़र की तुम पर तुम में रूप ऐ गुल ओ नसरीन ओ समन किस का है
हर पारखी और देखने वाली नज़र तुम पर ही पड़ती है; ऐ गुलाब, नसरीन और चमेली, आख़िर तुम में यह रूप किसका है?
8
इश्क़ उधर अक़्ल इधर धुन में चले हैं तेरी रस्ता अब देखिए दोनों में कठिन किस का है
तुम्हारी ही धुन में एक तरफ इश्क़ और दूसरी तरफ अक़्ल चल पड़े हैं, अब देखना यह है कि इन दोनों में से किसका रास्ता ज़्यादा कठिन है।
9
शान देखी नहीं गर तू ने चमन में उस की वलवला तुझ में ये ऐ मुर्ग़-ए-चमन किस का है
ऐ बाग़ के परिंदे, अगर तूने चमन में उस (माशूक़) की शान और ख़ूबसूरती नहीं देखी है, तो फिर तेरे अंदर यह जोश और तड़प किस की वजह से है?
10
हैं फ़साहत में मसल वाइ'ज़ ओ 'हाली' दोनों देखना ये है कि बे-लाग सुख़न किस का है
वाइज़ (उपदेशक) और हाली दोनों ही वाकपटुता में मिसाल हैं, अब देखना यह है कि निष्पक्ष और बेलाग बात किसकी है।
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