“The gaze of every discerning eye is drawn to you; whose beauty do you bear, O rose, eglantine, and jasmine?”
हर पारखी और देखने वाली नज़र तुम पर ही पड़ती है; ऐ गुलाब, नसरीन और चमेली, आख़िर तुम में यह रूप किसका है?
शायर यहाँ बाग़ के फूलों—गुलाब, नसरीन और चमेली—की दिलकश अदाओं पर हैरान होकर पूछता है कि हर हुस्न-परस्त की नज़र तुम पर ही क्यों ठहर जाती है। पर असली राज़ यह है कि तुम्हारे इस रूप-रंग और खुशबू में आख़िर किसकी झलक छिपी है? यह शेर बड़ी नज़ाकत से यह अहसास कराता है कि कुदरत की यह सारी खूबसूरती दरअसल महबूब या परवरदिगार के ही हुस्न का एक आईना है।
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