“Love on that side, reason on this, both set off in your thrall; let us see now, between the two, whose journey is the hardest of all.”
तुम्हारी ही धुन में एक तरफ इश्क़ और दूसरी तरफ अक़्ल चल पड़े हैं, अब देखना यह है कि इन दोनों में से किसका रास्ता ज़्यादा कठिन है।
इस शे’र में शायर ने दिल (इश्क़) और दिमाग़ (अक़्ल) की जानी-पहचानी कशमकश को एक बेहद ख़ूबसूरत मोड़ दिया है। महबूब के आकर्षण में ये दोनों ही अपनी-अपनी राह पर निकल पड़े हैं, मानो दोनों में आगे निकलने की होड़ लगी हो। अब देखना यह है कि किसका सफ़र ज़्यादा पुरदर्द साबित होता है—इश्क़ का, जो ख़ुद को मिटाने पर आमादा है, या अक़्ल का, जो बेबस होकर इस दीवानगी को समझने की नामुमकिन कोशिश कर रही है।
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