मुतमइन इस से मुसलमाँ न मसीही न यहूद दोस्त क्या जानिए ये चर्ख़-ए-कुहन किस का है

“Neither Muslim, Christian, nor Jew is content with its ways; friend, who knows to whom this ancient firmament belongs?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

इस पुराने आसमान (दुनिया) से न तो मुसलमान संतुष्ट है, न ईसाई और न ही यहूदी; ऐ दोस्त, कौन जाने कि यह प्राचीन आसमान आख़िर किसका है?

विस्तार

शायर यहाँ पुराने आसमान यानी ज़िंदगी और तक़दीर की बेरुखी पर बात कर रहा है, जिससे कोई भी इंसान पूरी तरह खुश नहीं है। चाहे कोई मुसलमान हो, ईसाई हो या यहूदी—हर कोई हालात और गर्दिश-ए-दौराँ के सामने खुद को बेबस ही पाता है। अपने दोस्त से मुख़ातिब होकर वह बड़ी सादगी से यह राज़ पूछता है कि यह कायनात आख़िर किसकी सगी है, जब यह किसी के भी मनमाफ़िक नहीं चलती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.