वाइ'ज़ इक ऐब से तू पाक है या ज़ात-ए-ख़ुदा वर्ना बे-ऐब ज़माने में चलन किस का है

“O preacher, either you are free of flaw, or God alone; / Else in this mortal world, whose conduct has remained unstained?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हे उपदेशक! किसी भी दोष से या तो केवल तुम मुक्त हो या फिर स्वयं ईश्वर; वरना इस ज़माने में किसका आचरण पूरी तरह निष्कलंक है?

विस्तार

यहाँ शायर बड़े ही चुटीले अंदाज़ में उस उपदेशक पर तंज़ कर रहे हैं, जो हमेशा दूसरों की कमियाँ गिनने में लगा रहता है। वह व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि इस दुनिया में अगर कोई पूरी तरह बेदाग़ है, तो या तो ख़ुदा की ज़ात है या फिर शायद आप—क्योंकि कोई भी आम इंसान तो ख़ामियों से अछूता नहीं रह सकता। यह शेर हमें याद दिलाता है कि इंसान होना ही गलतियों का पुतला होना है, इसलिए ख़ुद को पाक-साफ़ मानकर दूसरों पर उंगली उठाना सरासर पाखंड है।

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