फ़ैसला गर्दिश-ए-दौराँ ने किया है सौ बार मर्व किस का है बदख़शान ओ ख़ुतन किस का है

“A hundred times the turning wheel of time has decreed: to whom belongs Merv, and whose are Badakhshan and Khotan?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

वक़्त के बदलते दौर ने सैकड़ों बार यह फ़ैसला किया है कि मर्व किसका है और बदख़्शाँ तथा ख़ोतन पर किसका अधिकार है।

विस्तार

इस शेर में शायर इतिहास के आईने में सत्ता और मिल्कियत के घमंड पर बड़ी सादगी से चोट करता है। 'मर्व', 'बदख़्शां' और 'ख़ुतन' जैसी ऐतिहासिक और बेशकीमती सरज़मीनों का नाम लेकर वह याद दिलाता है कि वक़्त के पहिए ने न जाने कितनी बार यह तय किया कि इन पर किसका राज होगा। बड़े-बड़े हुक्मरान आए और मिट गए, मगर ज़मीन वहीं रही—यानी इस दुनिया में इंसान का किसी चीज़ पर मालिकाना हक सिर्फ़ एक वहम है।

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