ख़ूबियाँ अपने में गो बे-इंतिहा पाते हैं हम पर हर इक ख़ूबी में दाग़ इक ऐब का पाते हैं हम

“Though boundless virtues in ourselves we find, / Yet in each grace, the stain of a fault we find.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

यद्यपि हम अपने भीतर अनगिनत अच्छाइयाँ पाते हैं, फिर भी अपनी हर एक अच्छाई में हमें किसी न किसी ख़ामी या ऐब का दाग़ दिखाई देता है।

विस्तार

इस शेर में शायर बड़ी बेबाकी और ईमानदारी से अपने भीतर झांकता है, जहाँ उसे अपनी ख़ूबियों का एहसास तो है, पर घमंड ज़रा भी नहीं। यह ठीक वैसे ही है जैसे चाँद की चमक की तारीफ़ करते हुए उस पर लगा दाग़ भी साफ़ नज़र आ जाए; हमारी हर अच्छाई के साथ कोई न कोई कमज़ोरी या कमी जुड़ी ही रहती है। यह शेर इंसान की नामुकम्मल फ़ितरत को बड़ी सादगी से बयान करता है और हमें सिखाता है कि अपनी ख़ामियों को क़बूल करना ही असली समझदारी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

1 / 17Next →