“No sign of fear is manifest in any of our deeds, though deep within the heart, the fear of God perpetually breeds.”
यद्यपि हम अपने दिल में निरंतर ईश्वर का भय महसूस करते हैं, फिर भी हमारे कर्मों में इस भय का कोई निशान दिखाई नहीं देता।
यह शेर इंसान के दिल और उसके कर्मों के बीच के गहरे विरोधाभास को बड़ी सादगी से बयां करता है। शायर कहते हैं कि हमारे सीने में तो लगातार ख़ुदा का ख़ौफ़ और उसकी मौजूदगी का अहसास धड़कता है, मगर हमारे रोज़मर्रा के कामों में उस डर का कोई असर दिखाई नहीं देता। यह हम सबकी उस कमज़ोरी पर एक दर्दभरी नज़र है, जहाँ दिल की सच्चाई और बाहर के आचरण में एक गहरा फ़ासला रह जाता है।
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