जानते अपने सिवा सब को हैं बे-मेहर ओ वफ़ा अपने में गर शम्मा-ए-मेहर-ओ-वफ़ा पाते हैं हम

“We deem all save ourselves devoid of kindness and fidelity, if within our own hearts we discover the candle of love and loyalty.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

अगर हम अपने अंदर ज़रा सी भी मोहब्बत और वफ़ादारी पाते हैं, तो अपने सिवा बाकी सभी को बेमहर और बेवफ़ा समझने लगते हैं।

विस्तार

यह शेर इंसान के आत्म-मुग्ध स्वभाव और अहंकार पर एक बड़ी प्यारी और गहरी चोट करता है। शायर कहते हैं कि जैसे ही हमें अपने भीतर मोहब्बत या वफ़ा की ज़रा सी भी रौशनी दिखाई देती है, हम ख़ुद को ख़ास मानकर बाकी सारी दुनिया को बेदर्द और बेवफ़ा समझने लगते हैं। यह शेर हमें आईना दिखाता है कि अपनी छोटी सी अच्छाई का घमंड अक्सर हमें दूसरों की कद्र करने से रोक देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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