“Though bearing her coquettish whims has brought about my end, praise be to God that between us no quarrels now contend.”
भले ही उसके नाज़-नख़रे उठाते-उठाते मेरा काम तमाम हो गया (मैं मिट गया), लेकिन ईश्वर का शुक्र है कि हम दोनों के बीच कोई झगड़ा या तकरार नहीं है।
इस शेर में एक मीठा तंज़ और बेपनाह मोहब्बत की दास्तान है। आशिक़ कहता है कि महबूब के नाज़-ओ-अंदाज़ और नख़रे सहते-सहते भले ही मेरी जान पर बन आई हो, पर शुक्र है कि हमारे दरमियान कभी कोई अनबन या तकरार नहीं हुई। उसने अपने वजूद को पूरी तरह मिटा देना गवारा कर लिया ताकि रिश्ते में कभी कड़वाहट न घुले, और इसी बे-तकरार रिश्ते पर वह रब का शुक्रगुज़ार है।
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