“It is better to meet them feigning naivety; wisdom, after all, is no one's monopoly.”
उस व्यक्ति से नादान या अनजान बनकर ही मिलना बेहतर है, क्योंकि समझदारी या अक्लमंदी पर किसी एक का एकाधिकार नहीं है।
यह शेर ज़िंदगी का एक बड़ा खूबसूरत सलीका सिखाता है कि हर जगह अपनी अक्लमंदी साबित करना ज़रूरी नहीं होता। किसी के सामने खुद को थोड़ा नादान और सीधा दिखा देना दरअसल सबसे बड़ी समझदारी है, क्योंकि दानाई या समझ पर किसी अकेले का इज़ारा यानी एकाधिकार नहीं होता। जब हम होशियारी की नुमाइश छोड़ देते हैं, तो सामने वाले की अकड़ खुद-ब-खुद ढीली पड़ जाती है और बातचीत आसान हो जाती है।
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