सात पर्दों में नहीं ठहरती आँख हौसला क्या है तमाशाई का

“Even behind seven veils, the gaze refuses to be stayed; / What fearless daring the spectator has displayed!”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

सात पर्दों के पीछे भी देखने वाले की आँख नहीं ठहरती, उस तमाशाई की हिम्मत और हौसला तो देखिए।

विस्तार

यह शेर देखने वाले की अदम्य चाहत और बेबाक हौसले की दास्तान कहता है। 'सात पर्दों' का इशारा महबूब की मुकम्मल दूरी और राज़दारी की तरफ है, मगर तमाशाई की आँख किसी भी हद पर ठहरने का नाम नहीं लेती। यहाँ इश्क़ के उस दीवानेपन और हिम्मत की तारीफ़ है, जो हर आड़ और पाबंदी को चीरकर दीदार की हसरत पर अड़ा रहता है।

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