दरमियाँ पा-ए-नज़र है जब तक हम को दा'वा नहीं बीनाई का

“As long as the foot of gaze falters in between, we lay no claim to possessing true vision.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

जब तक हमारी नज़र बीच रास्ते में ही अटकी हुई है, तब तक हम सही दृष्टि रखने का कोई दावा नहीं करते।

विस्तार

शायर यहाँ बड़ी ख़ूबसूरती से निगाह को पाँव के रूप में देखते हैं, जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले ही बीच रास्ते में उलझ कर रह जाती है। उनका कहना है कि जब तक हमारी नज़र दुनियावी पर्दों और रुकावटों में फँसी है, तब तक हम यह दावा नहीं कर सकते कि हम सचमुच देखना जानते हैं। असली देखना सिर्फ़ आँखों की रोशनी नहीं, बल्कि हक़ीक़त और रूह की गहराई को पा लेना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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