कुछ तो है क़द्र तमाशाई की है जो ये शौक़ ख़ुद-आराई का

“The onlooker must surely hold some worth, given this fervent passion to adorn oneself.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

देखने वाले (तमाशाई) की ज़रूर कुछ न कुछ क़द्र है, तभी तो ख़ुद को सजाने-संवारने का यह शौक़ मौजूद है।

विस्तार

यह शे'र महबूब के सजने-संवरने और उसे देखने वाले की नज़र के खूबसूरत रिश्ते को दर्शाता है। अगर महबूब खुद को संवारने में इतना दिल लगा रहा है, तो इसका मतलब है कि उसे देखने वाले यानी तमाशाई की कद्र और अहमियत ज़रूर है। गहराई में देखें तो हुस्न का सारा वजूद ही इश्क की नज़र पर टिका है, क्योंकि अगर कोई सराहने वाला ही न हो, तो यह सारा बनाव-सिंगार बेमानी हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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