अभी हैं वो मिरे हमदम अभी हो जाएँगे दुश्मन नहीं इक वज़्अ पर सोहबत कभी यूँ है कभी वूँ है

“One moment they are my dearest friend, the next a bitter foe; our bond never rests in a single state, now it is this, now so.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

अभी वे मेरे करीबी दोस्त हैं और पल भर में दुश्मन बन जाते हैं। हमारी संगति कभी एक हाल पर नहीं रहती, कभी ऐसी होती है तो कभी वैसी।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने महबूब या करीबी दोस्त के बदलते मिज़ाज की बेचैनी को बेहद सादगी से बयां कर रहे हैं। जो इंसान एक पल जान छिड़कता हुआ हमदम नज़र आता है, वह अगले ही पल बेगाना और दुश्मन जैसा बर्ताव करने लगता है। यह साथ किसी एक रंग या ढर्रे पर ठहरता ही नहीं, और जज़्बात का यह उतार-चढ़ाव इंसान को हमेशा एक मीठी मगर थका देने वाली कशमकश में रखता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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