तिरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते अगर अपनी ज़िंदगी का हमें ए'तिबार होता

“Upon your promise, cruel one, I would have waited more, / If only of this fleeting life I could have been so sure.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐ ज़ालिम महबूब! तेरे वादे पर हम अभी और भी इंतज़ार कर लेते, बशर्ते हमें अपनी ज़िंदगी की मुद्दत पर कोई भरोसा होता।

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपने ज़ालिम महबूब से बेहद मासूमियत और तंज़ के साथ कह रहा है कि मुझे तुम्हारे झूठे वादे पर भी सब्र करने में कोई परहेज़ न था। शिकायत तुम्हारी बेवफ़ाई से नहीं, बल्कि ज़िंदगी की बेवफ़ाई से है कि वह इतनी मुख़्तसर और बेभरोसा है कि वादे के पूरा होने तक शायद साथ ही न दे। इस शेर में महबूब की बेरुख़ी पर चोट भी है और अपनी फ़ानी ज़िंदगी की बेबसी का एक दर्दनाक एहसास भी।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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