“This stubborn soul remained deprived of death's sweet thrill; the dagger struck, but the executioner's arm lost its will.”
यह सख्त जान व्यक्ति कत्ल होकर भी असंतुष्ट रह गया, क्योंकि जब खंजर चला तो जल्लाद का हाथ ही थक कर रुक गया।
इस शे’र में आशिक़ का दर्द एक अनोखे और गहरे तंज़ के साथ सामने आता है, जहाँ वह अपने दुखों से निजात पाने के लिए मौत की राह तक रहा है। वह खुद को 'सख़्त-जाँ' यानी बेइंतहा तकलीफ़ सहने वाला बताता है, जो महबूब के हाथों क़त्ल होकर सुकून पाना चाहता था। मगर विडंबना देखिए कि ख़ंजर चलते ही जल्लाद का हाथ थक कर रुक गया, और आशिक़ इस बात से उदास रह गया कि उसे मौत की मुकम्मल राहत भी नसीब न हो सकी।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
