ग़ज़ल

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

باقی جہاں میں قیس نہ فرہاد رہ گیا
दाग़ देहलवी· Ghazal· 13 shers· radif: रह गया

यह ग़ज़ल संसार की नश्वरता और क़ैस व फ़रहाद जैसे अमर प्रेमियों के केवल अफ़्साने शेष रह जाने के मलाल को दर्शाती है। दार्शनिक और उदास भाव के साथ, यह इश्क़ में आशिक़ की असीम सहनशीलता और दर्द सहने की अटूट क्षमता को उजागर करती है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया अफ़्साना आशिक़ों का फ़क़त याद रह गया
इस दुनिया में न तो क़ैस बाक़ी रहा और न ही फ़रहाद, अब केवल इन आशिक़ों की दास्तान ही यादों में रह गई है।
2
ये सख़्त-जाँ तो क़त्ल से नाशाद रह गया ख़ंजर चला तो बाज़ू-ए-जल्लाद रह गया
यह सख्त जान व्यक्ति कत्ल होकर भी असंतुष्ट रह गया, क्योंकि जब खंजर चला तो जल्लाद का हाथ ही थक कर रुक गया।
3
पाबंदियों ने इश्क़ की बेकस रखा मुझे मैं सौ असीरियों में भी आज़ाद रह गया
इश्क़ की पाबंदियों ने मुझे बेबस और लाचार बनाए रखा, लेकिन इसके बावजूद मैं सैकड़ों क़ैदों में भी आज़ाद ही रहा।
4
चश्म-ए-सनम ने यूँ तो बिगाड़े हज़ार घर इक काबा चंद रोज़ को आबाद रह गया
महबूब की आँखों ने वैसे तो हज़ारों घर बर्बाद कर दिए, सिर्फ़ एक काबा ही था जो कुछ दिनों के लिए आबाद रह सका।
5
महशर में जा-ए-शिकवा किया शुक्र यार का जो भूलना था मुझ को वही याद रह गया
क़यामत के दिन शिकायत करने के बजाय मैंने अपने महबूब का शुक्रिया अदा किया, क्योंकि जो बात मुझे भूल जानी चाहिए थी, मुझे बस वही याद रह गई।
6
उन की तो बन पड़ी कि लगी जान मुफ़्त हाथ तेरी गिरह में क्या दिल-ए-नाशाद रह गया
उनकी तो किस्मत चमक गई कि उन्हें मुफ़्त में एक जान मिल गई, लेकिन ऐ दुखी दिल, अब तेरी जेब में क्या बचा रह गया?
7
पुर-नूर हो रहेगा ये ज़ुल्मत-कदा अगर दिल में बुतों का शौक़-ए-ख़ुदा-दाद रह गया
अगर दिल में मूर्तियों (महबूब) का यह ईश्वर-प्रदत्त शौक़ बाक़ी रहा, तो यह अंधकार भरा घर ज़रूर रोशनी से भर जाएगा।
8
यूँ आँख उन की कर के इशारा पलट गई गोया कि लब से हो के कुछ इरशाद रह गया
उनकी आँख इस तरह इशारा करके मुड़ गई जैसे कोई बात होंठों तक आकर भी अनकही रह गई हो।
9
नासेह का जी चला था हमारी तरह मगर उल्फ़त की देख देख के उफ़्ताद रह गया
उपदेशक का मन भी हमारी तरह प्रेम करने के लिए ललचाया तो था, लेकिन प्यार की मुसीबतों और परेशानियों को देख-देख कर वह रुक गया।
10
हैं तेरे दिल में सब के ठिकाने बुरे भले मैं ख़ानुमाँ-ख़राब ही बर्बाद रह गया
तुम्हारे दिल में अच्छे और बुरे हर तरह के लोगों के लिए जगह है, मगर सिर्फ़ मैं ही बेघर और बर्बाद रह गया।
11
वो दिन गए कि थी मिरे सीने में कुछ ख़राश अब दिल कहाँ है दिल का निशाँ याद रह गया
वे दिन बीत गए जब मेरे सीने में कुछ दर्द या चुभन थी; अब दिल कहाँ बचा है, बस दिल का एक निशान ही याद रह गया है।
12
सूरत को तेरी देख के खिंचती है जान-ए-ख़ल्क़ दिल अपना थाम थाम के बहज़ाद रह गया
तुम्हारा चेहरा देखकर पूरी दुनिया की जान निकली जाती है, और यहाँ तक कि महान चित्रकार बहज़ाद भी अपना दिल थाम कर बेबस और हैरान रह गया।
13
ऐ 'दाग़' दिल ही दिल में घुले ज़ब्त-ए-इश्क़ से अफ़्सोस शौक़-ए-नाला-ओ-फ़रियाद रह गया
ऐ दाग़, इश्क़ के दर्द को दबाए रखने की वजह से दिल अंदर ही अंदर घुटकर पिघल गया, और अफ़सोस कि रोने और फ़रियाद करने की हसरत अधूरी ही रह गई।
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