“This house of darkness will be bathed in radiant light, if in the heart this God-given passion for idols abides.”
अगर दिल में मूर्तियों (महबूब) का यह ईश्वर-प्रदत्त शौक़ बाक़ी रहा, तो यह अंधकार भरा घर ज़रूर रोशनी से भर जाएगा।
यहाँ शायर एक बहुत प्यारा और गहरा विरोधाभास पेश कर रहे हैं—कि दिल का यह अंधेरा कोना भी नूर से भर सकता है, बशर्ते उसमें महबूब की चाहत ज़िंदा रहे। उर्दू शायरी की रिवायत में बुतों यानी इंसानी हुस्न से मोहब्बत को गुनाह नहीं, बल्कि ख़ुदा की अता की हुई नेमत माना गया है। बात सीधी सी है, अगर दिल में सच्चा इश्क़ सलामत रहे, तो वही लगन इंसान के अंदर की सारी तारीकी और मायूसी को रौशनी में बदल देती है।
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