पुर-नूर हो रहेगा ये ज़ुल्मत-कदा अगर दिल में बुतों का शौक़-ए-ख़ुदा-दाद रह गया

“This house of darkness will be bathed in radiant light, if in the heart this God-given passion for idols abides.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अगर दिल में मूर्तियों (महबूब) का यह ईश्वर-प्रदत्त शौक़ बाक़ी रहा, तो यह अंधकार भरा घर ज़रूर रोशनी से भर जाएगा।

विस्तार

यहाँ शायर एक बहुत प्यारा और गहरा विरोधाभास पेश कर रहे हैं—कि दिल का यह अंधेरा कोना भी नूर से भर सकता है, बशर्ते उसमें महबूब की चाहत ज़िंदा रहे। उर्दू शायरी की रिवायत में बुतों यानी इंसानी हुस्न से मोहब्बत को गुनाह नहीं, बल्कि ख़ुदा की अता की हुई नेमत माना गया है। बात सीधी सी है, अगर दिल में सच्चा इश्क़ सलामत रहे, तो वही लगन इंसान के अंदर की सारी तारीकी और मायूसी को रौशनी में बदल देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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