उन की तो बन पड़ी कि लगी जान मुफ़्त हाथ तेरी गिरह में क्या दिल-ए-नाशाद रह गया

“Fortune favored them indeed, winning a life for free; what remains tied in your purse, O sorrowful heart?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

उनकी तो किस्मत चमक गई कि उन्हें मुफ़्त में एक जान मिल गई, लेकिन ऐ दुखी दिल, अब तेरी जेब में क्या बचा रह गया?

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने उदास दिल से एक बड़ा ही दर्दमंद सवाल पूछ रहा है, जहाँ इश्क़ को एक घाटे के सौदे की तरह दिखाया गया है। महबूब की तो बन आई कि उसे बिना कोई क़ीमत चुकाए एक आशिक़ की पूरी ज़िंदगी मुफ़्त में मिल गई। मगर ऐ नाशाद दिल, तेरी 'गिरह' यानी पल्लू की उस गाँठ में क्या बचा जहाँ लोग अपनी पूँजी संभालते थे? तूने तो अपनी जान तक लुटा दी और आख़िरकार तेरे हाथ सिर्फ़ ख़ालीपन और तबाही ही आई।

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