“They would not pause even for a breath beneath the celestial Tūbā tree, who sit yearning only for the sheltering shadow of your hem.”
जो लोग आपके दामन के साये की हसरत लिए बैठे हैं, वे जन्नत के तूबा दरख़्त के नीचे एक पल भी ठहरने या आराम करने के लिए खड़े नहीं होंगे।
शायर इस शेर में इश्क़ के उस मक़ाम की बात कर रहे हैं जहाँ महबूब की पनाह के आगे जन्नत की नेमतें भी फीकी पड़ जाती हैं। तूबा जन्नत का वह मुबारक दरख़्त है जिसका साया सबसे सुकूनदेह माना जाता है, मगर आशिक़ कहता है कि जो तेरे दामन की छाँव के तलबगार हैं, वे तूबा के नीचे एक पल भी सुस्ताने के लिए नहीं रुकेंगे। यानी महबूब की ज़रा-सी क़ुर्बत और उसका दामन ही आशिक़ के लिए असली जन्नत और सुकून है।
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