मुझ में दम जब तक रहा मुश्किल में थे तीमारदार मेरी आसानी से सब यारों की आसानी हुई

“As long as breath lingered in me, my caregivers suffered strain; with my ease came ease to all, and relief did my friends attain.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

जब तक मुझमें जान बाकी रही, मेरी देखरेख करने वाले परेशानी में रहे। मेरी मृत्यु से जैसे ही मुझे राहत मिली, वैसे ही मेरे सभी दोस्तों की भी मुश्किलें आसान हो गईं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने बीमारी के दर्द और मौत को बड़े ही संजीदा और दिल को छू लेने वाले अंदाज़ में बयां किया है। जब तक उनमें सांस बाकी थी, उनकी देखभाल करने वाले अपने अज़ीज़ लोग भी लगातार परेशानी और चिंता झेल रहे थे। शायर ने अपनी मौत को बड़े सहज भाव से 'आसानी' कहा है—यानी उसका दुनिया से रुख़सत होना न सिर्फ़ उसकी अपनी तकलीफों का अंत था, बल्कि उसके चाहने वालों को भी एक भारी बोझ और आज़माइश से आज़ाद कर गया।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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