पानी पी पी के तौबा करता हूँ पारसाई सी पारसाई है

“Gulping water again and again, I vow to repent—what a wondrous piety is this piety of mine!”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मैं बार-बार पानी पीकर तौबा करता हूँ; मेरी यह परहेज़गारी और पवित्रता भी क्या ख़ूब है!

विस्तार

यहाँ शायर बड़े ही मीठे तंज़ और सादगी के साथ अपनी तौबा का मज़ाक उड़ा रहा है। बार-बार पानी पीकर तौबा करने की तस्वीर उस प्यास और बेचैनी को दिखाती है, जो गुनाह और पछतावे के फेर में बार-बार भटकती है। खुद को 'पारसा' यानी सच्चा परहेज़गार कहना दरअसल एक गहरा व्यंग्य है, जो इंसान की इस कमज़ोरी को सामने लाता है कि वह वादे तो बहुत पक्के करता है मगर दिल के हाथों फिर फिसल जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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