हम ने मर कर हिज्र में पाई शिफ़ा ऐसे अच्छों का वो मातम क्या करें

“By dying in separation, I found my cure at last; why would she mourn for one who has thus recovered?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

जुदाई के ग़म में हमने मरकर ही सेहत और शिफ़ा पाई है, तो भला महबूब ऐसे ठीक हो जाने वालों का मातम क्यों करे?

विस्तार

इस शेर में दर्द और तंज़ का एक बेहद ख़ूबसूरत संगम है। आशिक़ जुदाई की तड़प को एक लालाज बीमारी मानता है, जिसका इलाज सिर्फ़ मौत ही था—यानी मर कर ही उसे इस दर्द से हमेशा के लिए 'शिफ़ा' मिली। यहाँ 'अच्छे' लफ़्ज़ में छुपा गहरा व्यंग्य दिल को छू जाता है, क्योंकि जब कोई बीमार सेहतमंद हो जाए, तो कोई उसका मातम क्यों मनाए? यह महबूब से एक मासूम और दिलकश शिकवा है कि मेरी राहत ही मेरी मौत बन गई।

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